गुरुवार, 11 फ़रवरी 2010
"इस देश में क्रांति नहीं हो सकती"
ज़्यादा पुरानी नहीं है , एक फिल्म में ये डायलॉग सुना था । आप देख सकते हैं , यहाँ सब्र वाले समझदार लोग हैं - ठीक राजनीतिज्ञों की तरह । क्योंकि हम में चरित्र नहीं था , इसीलिये हमने नए ज़माने के हिसाब से चलने को सही माना और जिनमें हिम्मत थी उनकी राहों में हमने बम रखे , बंदूक रखी , उन्हें मार डाला क्योंकि अपनी हस्ती बचानी थी । खुद राज करना था । शायद भगवान भी यही चाहता था । तभी तो गांधी को जल्दी उठा लिया , पटेल को उठा लिया , लोहिया और जे पी कुछ नहीं कर सके । इंदिरा गांधी में इच्छाशक्ति थी - मारी गयी । राजीव गांधी को राजनीति नहीं आती थी , मारा गया । और जब तक इस देश के कर्णधारों (मुझे इस शब्द का ठीक-ठीक अर्थ मालूम नहीं है) को होश आता , तब तक एक बाबरी ढह चुकी थी । अब 'डैमेज कंट्रोल' में लगे हैं : "पार्टी की छवि भी सुधर जाएगी" । समझदार लोग जानते हैं , क्रांति का अब कोई मतलब नहीं है .
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6 टिप्पणियां:
क्रांति का अब कोई मतलब नहीं
sahi
क्रांति क्या बात कर रहे हैं,
Is deshme jo ho sakta hai,ya nahi ho sakta,uske zimmedaar ham sab deshwasee hain...aur kaun!
Loktantr me kranti hogi...lekin cheen kee tarah nahee ho sakti..ek sikkeke do bazu hote hain!
अच्छी लगी आपकी रचना .. इस नए चिट्ठे के साथ हिन्दी चिट्ठा जगत में आपका स्वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!
kharaab beejon se achhi fasal kee ummeed kyon rakhte ho jee
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